गजब: चीन को मात देने की तैयारी! IIT-पटना को मिला बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का पेटेंट, कैसे मिलेगा फायदा?

पटना : आईआईटी पटना (IIT Patna) को बड़ी कामयाबी मिली है। केंद्र सरकार के पेटेंट कार्यालय से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना को स्वदेश में विकसित ‘बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम’ (BMS) पर एक पेटेंट हासिल हुए है। आईआईटी पटना के एकेडमिक डीन एके ठाकुर ने इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने टीओआई से बातचीत में कहा कि ये पेटेंट तकनीक देश को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में काफी मदद करेगी। 20 साल तक इस तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल पर आईआईटी-पटना का कॉपीराइट रहेगा।

इलेक्ट्रिक व्हीकल में इस्तेमाल होगी स्वदेशी तकनीक
अभिजीत कुमार और सौरभ रे समेत छात्रों के एक ग्रुप ने आईआईटी पटना के इन्क्यूबेशन सेंटर में स्टार्टअप योजना के तहत इसे विकसित किया। बैटरी मैनेजमेंट बिजली से चलने वाले टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर गाड़ियों में स्वदेशी तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल सुनिश्चित करेगा। आईआईटी पटना के एकेडमिक डीन एके ठाकुर ने कहा कि इस कदम से चीन के बाजार पर इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर देश की निर्भरता को कम होगी।

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इस कामयाबी से चीन पर कम होगी निर्भरता
एके ठाकुर ने आगे बताया कि बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) एक कॉम्पैक्ट सर्किट के रूप में एक इलेक्ट्रॉनिक सबसिस्टम है। जिसमें अनिवार्य रूप से ऑपरेशन सेफ्टी और लिथियम-आयन बैटरी (LIB) पैक की सुरक्षा जरूरी है। इसके अलावा, BMS में ड्राइविंग के दौरान इलेक्ट्रिक गाड़ी के बैटरी पैक की चार्जिंग स्थिति समझने, पहचानने और प्रदर्शित करने की क्षमता है। ब्लूटूथ और GPS कनेक्टिविटी की खास सुविधाओं के साथ, यह बैटरी पैक बदलने या चार्जिंग के लिए एक अलार्म भी देगा।

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बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का पेटेंट
हालांकि, इलेक्ट्रिक व्हीकल में बैटरी पैक की सुरक्षा देश में EV मिशन की सफलता के लिए सबसे जरूरी है। भारत इस अहम प्रोडक्ट के आयात पर बहुत अधिक निर्भर करता है। ऐसी स्थिति में BMS के लिए स्वदेशी तकनीक का निर्माण और इसका पेटेंट होना आईआईटी-पटना के लिए बेहद अहम है। ये आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा योगदान है।

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‘आत्मनिर्भर भारत’ में अहम कदम
एके ठाकुर ने बताया कि बीएमएस तकनीक बैटरी और बैटरी पैक से जुड़ा होता है, जिसमें सेफ्टी, परफॉर्मेंस, चार्ज रेट और स्थायित्व का स्तर अहम भूमिका निभाता है। लिथियम-आयन बैटरी का बड़े पैमाने पर पोर्टेबल बिजली डिवाइस, सौर फोटोवोल्टिक (एसपीवी) एप्लिकेशन, इलेक्ट्रिक व्हीकल आदि में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रोडक्ट 13 मार्च, 2022 को लॉन्च किया गया था। देश में बीएमएस इम्पोर्ट की भारी निर्भरता को दूर करने में अहम रोल निभाएगा। साथ ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक अहम कदम है।



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